‘सारे जहाँ से अच्छा’

‘हिन्दुस्तान’ प्राय: हर कवि की रचना में शामिल रहा है। अंगरेजों की काली परछाई और उस परछाई से बाहर आने के बाद के समय में देष्भाक्ति की भावना को कविताओं और गीतों के माध्यम से जीवंत रखने का प्रयास होता रहा है। हिन्दुस्तान को केंद्र में रखकर की गई शायरी को ‘सारे जहाँ से अच्छा’ एलबम के रूप में पेश किया गया है।

 
 
 
 

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मैथिलीशरण गुप्त

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रवीन्‍द्र नाथ टैगोर

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जयशंकर प्रसाद

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उरूज़े कामयाबी पर कभी हिन्दोस्ता होगा

जगदंबाप्रसाद मिश्र

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भूला रे भोला भूखा भारत देश

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फूलों का कुन्ज़े दिलकश

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